Jun 11, 2011

बारिश में मस्ती

पानी बरसा छम छम छम 


 छाता ले कर निकले हम 


बादल गरजा डम डम डम 


पांव फिसल गये गिर गये हम 


9 comments:

जाट देवता (संदीप पवाँर) said...

बारिश का पानी और उसमें नहाने का मजा,

शिखा कौशिक said...

tum to ho sundartam .bahut pyari prastuti .badhai .

रावेंद्रकुमार रवि said...

घर में गर्मी बहुत लगी, तो
छाता लेकर निकले हम!
बादल पड़ा सोच में कुछ पल,
फिर बरसाया जल झम-झम!
--
तुम्हारी मस्ती देखकर
इस कविता की रचना हो गई!
इसे तुम्हारी तस्वीर के साथ
जल्दी ही "सरस पायस" पर
प्रकाशित किया जाएगा!

प्रवीण पाण्डेय said...

छम छम बारिश, वाह।

डॉ. नागेश पांडेय "संजय" said...

बहुत ही रोचक. मेरी बधाई .

आपका हार्दिक स्वागत

चैतन्य शर्मा said...

अरे वाह ......मजेदार रही बारिश में मस्ती....

Kashvi Kaneri said...

बरिश में मस्ती बहुत अच्छा......

Kashvi Kaneri said...

Welcome to kuhukiduniya....

abhi said...

अरे इशिता..ये फोटो तो मैं फेसबुक पे देख चूका हूँ ;)